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2026 में NGOs को किन ज़रूरी कंप्लायंस पर सबसे पहले ध्यान देना चाहिए?
डोनर की ड्यू डिलिजेंस में आमतौर पर कौन-सी कमियाँ और रेड फ़्लैग्स दिखते हैं?
और छोटे NGOs ऑडिट या डोनर रिव्यू के लिए बिना आख़िरी समय की भागदौड़ के कैसे तैयार हो सकते हैं?
यह प्रैक्टिकल सेशन भारतीय NGOs के लिए ज़रूरी कंप्लायंस को आसान भाषा में समझाएगा, खासतौर पर छोटे NGOs को ड्यू डिलिजेंस–रेडी बनाने पर फोकस करते हुए।
सेशन में असली उदाहरणों के ज़रिए बताया जाएगा कि आमतौर पर कहाँ गलतियाँ हो जाती हैं, डॉक्युमेंटेशन में क्या दिक्कतें आती हैं, और ऑडिट व डोनर रिव्यू के लिए बेहतर तैयारी कैसे की जाए।
मुख्य सीख
इस सेशन के बाद प्रतिभागी सीखेंगे:
किन कंप्लायंस को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए
डोनर ड्यू डिलिजेंस में दिखने वाली आम गलतियाँ और रेड फ़्लैग्स
डॉक्युमेंटेशन और रिकॉर्ड सही तरीके से कैसे रखें
ऑडिट, डोनर असेसमेंट और रेगुलेटरी रिव्यू के लिए आत्मविश्वास से कैसे तैयारी करें
कौन शामिल हों
यह सेशन छोटे और मिड-साइज़ NGOs के प्रोग्राम हेड्स, फ़ाइनेंस और कंप्लायंस टीम, तथा ग्रांट मैनेजमेंट या डोनर रिपोर्टिंग से जुड़े लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी है—खासतौर पर उन संस्थाओं के लिए जो ऑडिट या डोनर ड्यू डिलिजेंस की तैयारी कर रही हैं।
सेशन से पहले इन्हें देखें
सेशन से पहले आप इन अतिरिक्त संसाधनों को देख सकते हैं।

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