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भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDPA) 2023 नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने और उसके सही उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। यह सेशन संस्थान को इस कानून के व्यावहारिक पहलुओं को समझने और अपने कामकाज में लागू करने में मदद करेगा। खासकर जब संस्थान दाताओं, स्वयंसेवकों और लाभार्थियों की संवेदनशील जानकारी संभालते हैं, तो यह कानून उनके लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस सेशन में प्रतिभागी जानेंगे:
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDPA) 2023 के प्रमुख सिद्धांत और उनका महत्व
सहमति लेने की नई प्रक्रिया और डेटा का सीमित व उद्देश्य-विशेष उपयोग
डेटा सुरक्षा से जुड़े उपाय और व्यक्तियों के अधिकार जैसे – अपने डेटा को देखना, संशोधित करना और हटाना
संस्थान की कानूनी जिम्मेदारियाँ जैसे गोपनीयता नोटिस देना, डेटा सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति (यदि आवश्यक हो), और डेटा उल्लंघन की रिपोर्ट करना
बच्चों के डेटा के लिए विशेष सुरक्षा उपाय और संस्थान की अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ
यह समझ कि कानून का पालन न करने पर क्या परिणाम हो सकते हैं और कैसे समय रहते तैयारी करनी है
सेशन में उठाए जाने वाले मुख्य प्रश्न
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDPA) 2023 संस्थान के कामकाज को कैसे प्रभावित करेगा?
संस्थान को अपनी प्रक्रियाओं और सिस्टम में क्या बदलाव करने होंगे?
बच्चों और कमजोर वर्गों के डेटा से जुड़े कौन से विशेष नियम लागू होंगे?
डेटा सुरक्षा और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए संस्थान को अगले कदम क्या उठाने चाहिए?
किसके लिए उपयोगी
यह सेशन खासकर उन संस्थान के लिए उपयोगी है, जो नागरिकों और बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी (PII) एकत्रित करते हैं या उसका उपयोग करते हैं। खासकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सामुदायिक विकास और चाइल्ड वेलफेयर जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले संस्थान इससे अधिक लाभान्वित होंगे।
सेशन से पहले ज़रूर देखें
सेशन से पहले नीचे दिए गए रिसोर्स पढ़ना फायदेमंद होगा, क्योंकि ये सीधे सेशन से जुड़े हुए हैं।


