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क्या आप जानते हैं कि 2014 में CSR अनिवार्यता के बाद से भारतीय कंपनियों ने CSR पहलों पर ₹1.84 लाख करोड़ से अधिक खर्च किया है?
वर्ष 2034 तक कॉर्पोरेट आय में वृद्धि के कारण वार्षिक खर्च ₹1.2 लाख करोड़ तक तीन गुना बढ़ने की संभावना है। यह प्रवृत्ति सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने और नवाचार को बढ़ावा देने में CSR की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है, साथ ही समावेशी विकास को प्रोत्साहित करती है।
हालांकि CSR खर्च बढ़ रहा है, फिर भी कई नॉनप्रॉफिट्स को फंडिंग प्राप्त करने में निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:
अपर्याप्त जागरूकता: CSR कानूनों, संशोधनों और कॉर्पोरेट जुड़ाव प्रथाओं की सीमित समझ।
मूल्यांकन की मांगें: प्रभाव आकलन और पारदर्शिता के लिए कॉर्पोरेट अपेक्षाओं को पूरा करने में कठिनाई।
प्रशासनिक बोझ: जटिल वैधानिक और परिचालन अनुपालन आवश्यकताओं से संघर्ष।
कठोर पात्रता: कड़े मापदंडों के कारण बाहर होना, जैसे कि धारा 12A और 80G के तहत अनिवार्य पंजीकरण और न्यूनतम तीन वर्षों का संचालन रिकॉर्ड।
यदि आप CSR कानून की अनुपालन आवश्यकताओं को समझने और इनसे निपटने के लिए उत्सुक हैं, तो IPN और Sattva Consulting मिलकर यह सेशन आयोजित कर रहे हैं। यह सेशन आपकी संस्था को CSR डोनर्स के साथ प्रभावी रूप से जुड़ने और उनकी अनुपालन आवश्यकताओं को समझने में मदद करेगा।
CSR नियमों और फंडिंग अपेक्षाओं को समझें।
CSR और इसके नवीनतम रुझानों की आसान समझ प्राप्त करें।
कॉर्पोरेट की ड्यू डिलिजेंस अपेक्षाओं को पूरा करना सीखें।
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