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गैर-लाभकारी संस्थाएँ अपने विचारों को ऐसे स्पष्ट और प्रभावी प्रपोज़ल में कैसे बदल सकती हैं, जो डोनर्स को आसानी से समझ आए और उन्हें संस्था के काम से जोड़ सके?
एक अच्छा प्रपोज़ल सिर्फ यह नहीं बताता कि संस्था क्या काम करती है। वह डोनर को यह समझने में मदद करता है कि समस्या क्या है, उसका समाधान क्या है, इससे क्या बदलाव आएगा और आपकी संस्था इस काम को करने के लिए सही क्यों है।
इस व्यावहारिक सत्र में प्रतिभागी सीखेंगे कि प्रपोज़ल को सही तरीके से कैसे तैयार और मजबूत किया जाए, अपने काम और प्रभाव को स्पष्ट रूप से कैसे बताया जाए और प्रपोज़ल लिखते समय होने वाली आम गलतियों से कैसे बचा जाए।
मुख्य सीख
एक मजबूत प्रपोज़ल में क्या होना चाहिए — समस्या, समाधान, अपेक्षित परिणाम और प्रभाव को स्पष्ट रूप से बताना।
प्रपोज़ल को इस तरह तैयार करना कि वह स्पष्ट, संक्षिप्त और डोनर्स के लिए आसानी से समझने योग्य हो।
अपने काम, दृष्टिकोण और प्रभाव को प्रपोज़ल में बेहतर तरीके से सामने रखना।
प्रपोज़ल लिखते समय होने वाली आम गलतियों को पहचानना और उनसे बचना।
अपने प्रपोज़ल को बेहतर और डोनर्स के लिए अधिक प्रभावी बनाने के व्यावहारिक तरीके सीखना।
किसे भाग लेना चाहिए
गैर-लाभकारी संस्थाओं के संस्थापक, सीईओ, फंडरेज़िंग और प्रोग्राम टीमों के सदस्य, और संस्था के ऐसे नेतृत्वकर्ता जो अपनी प्रपोज़ल लिखने की क्षमता को बेहतर बनाना और फंडिंग के लिए दिए जाने वाले प्रपोज़ल की गुणवत्ता को मजबूत करना चाहते हैं।
CSR विशेषज्ञ प्रशांत पाल, PURE इंडिया ट्रस्ट के फाउंडर एवं CEO द्वारा संचालित इस सत्र में NGOs सीखेंगी कि एक बेहतर और प्रभावी प्रपोज़ल कैसे लिखा जाए। इसमें वे अपने काम, समस्या, समाधान और इम्पैक्ट को स्पष्ट और प्रभावी तरीके से प्रपोज़ल में प्रस्तुत करना सीखेंगी, ताकि डोनर्स उनकी संस्था और काम को बेहतर ढंग से समझ सकें।
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सेशन से पहले इन्हें देखें

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