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डिजिटल मार्केटिंग को अक्सर बहुत जटिल, महंगा, या सिर्फ़ बड़ी संस्थाओं के लिए माना जाता है। लेकिन हक़ीक़त यह है कि कई NPOs डिजिटल टूल्स इसलिए नहीं अपनापाते क्योंकि वे काम नहीं करते, बल्कि इसलिए क्योंकि उनसे जुड़ी गलतफहमियाँ, अस्पष्ट प्राथमिकताएँ और व्यावहारिक सीमाएँ होती हैं।
यह सेशन सोशल सेक्टर में डिजिटल मार्केटिंग से जुड़ी आम गलत धारणाओं को समझेगा और उन वास्तविक चुनौतियों पर बात करेगा जिनका सामना NPOs को डिजिटल टूल्स अपनाते समय करना पड़ता है—जैसे सीमित टीम, बजट और प्रभाव को समझने में कठिनाई।
इस सेशन का फोकस ऐसे व्यावहारिक, कम-खर्च तरीकों और अच्छी प्रैक्टिसेज़ पर होगा जिन्हें NPOs बिना बड़ी टीम या भारी निवेश के अपनाकर अपनी पहुँच, जुड़ाव और विज़िबिलिटी बेहतर कर सकते हैं।
मुख्य सीख
डिजिटल मार्केटिंग से जुड़े आम मिथ्स और वास्तव में क्या काम करता है
सोशल सेक्टर में डिजिटल अपनाने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों की समझ
सीमित संसाधनों में डिजिटल का बेहतर उपयोग करने के व्यावहारिक टूल्स और तरीके
यह सेशन उन NPO टीम्स के लिए उपयोगी है जो डिजिटल मार्केटिंग को ज़्यादा समझदारी, यथार्थ और रणनीतिक तरीके से इस्तेमाल करना चाहती हैं।
सेशन से पहले इन्हें देखें
सेशन से पहले आप इन अतिरिक्त संसाधनों को देख सकते हैं।
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