नए डेटा प्रोटेक्शन क़ानून का वर्णन: FAQ
DPDP एक्ट यानी डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 9 अगस्त 2023 को पास हुआ था जो भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा के संग्रहण, उपयोग और प्रसंस्करण को रेगुलेट करता है। यह एक्ट, डिजिटल और नॉन-डिजिटल दोनों रूपों में इकठ्ठा किए गए (और बाद में डिजिटल बनाए गए) डेटा पर लागू होता है जिससे डेटा सिद्धांतों के गोपनीयता अधिकारों को मजबूती मिलती है। यह क़ानून, उन संस्थानों के दायित्वों की रूपरेखा तैयार करती है जिन्हें डेटा फिड्यूसरी के नाम से जाना जाता है जो पर्सनल डेटा इकठ्ठा, उपयोग और प्रसंस्कृत करने का काम करते हैं। इस क़ानून का लक्ष्य, लोगों के पर्सनल डेटा को डेटा फिड्यूसरी के साथ शेयर किए जाने पर लोगों के गोपनीयता अधिकारों की रक्षा करना है।
पास हो चुके इस सबसे नए डेटा प्रोटेक्शन क़ानून के उद्देश्यों के बारे में जानने-समझने में नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशंस की मदद करने के लिए इस रिसोर्स को तैयार किया गया है। इसमें इस एक्ट और इसके कार्यों के बारे में सबसे ज्यादा अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) शामिल हैं।
नॉन-प्रॉफिट में काम करने वाले ऐसे किसी व्यक्ति को इस रिसोर्स की सिफारिश की जाती है जो DPDP एक्ट को समझना चाहता है, ख़ास तौर पर डेटा से जुड़ी टीमें और लोग।
ध्यान दें: इस रिसोर्स को गेमचेंजर लॉ के सहयोग से IPN द्वारा आयोजित एक वेबिनर के आधार पर तैयार किया गया है। इस रिसोर्स में कोई कानूनी सलाह शामिल नहीं है बल्कि इसका मकसद इसे पढ़ने वालों को जनरल गाइडेंस देना है। अपनी परिस्थितियों और ऑपरेशंस से जुड़ी कानूनी सलाह के लिए कृपया अपने कानूनी सलाहकार / वकील से बात करें।